गुरुवार, 24 अक्टूबर 2024

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पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 01 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 31 अक्टूबर को दिवाली मनाई जाएगी।


दीपावली अमावस्या की रात्रि में मनाई जाती है।जब 1 नवंबर को रात्रि में अमावस्या रहेगी ही नहीं तब दीपावली कैसे मना सकते हैं????


कुछ पर्व दिन में मनाये जाते हैं उनके लिए दिन में तिथि का होना आवश्यक है। कुछ पर्व रात्रि में मनाये जाते हैं उनके लिए रात्रि में तिथि रहना आवश्यक है। इतनी सामान्य सी बात पर भी विवाद हो रहा है। तिथि मुहूर्त आदि की गणना स्थानीय समयानुसार होती है। जन्मकुंडली आदि में भी स्थानीय समय ही मान्य होता। सभी स्थानों पर स्टैंडर्ड समय और स्थानीय समय में अंतर होता है। अतः भारत में और वह भी विशेष शहरों में स्थानीय समय अलग अलग होता है। प्रति एक देशान्तर पर चार मिनट का अंतर आता है। कलकत्ता में आज सूर्योदय 5-36 पर हुआ,सूरत में आज सूर्योदय 6-37 पर हुआ। अर्थात एक देश में ही स्थानीय समय में एक घंटे छह मिनट का अंतर है। भारत में अमावस्या 31 नवंबर को है वह एक नवंबर को अमेरिका में होगी। तो क्या अमेरिका के शुभ के लिए हमें एक नवंबर को दीपावली मनानी चाहिए????? 

जबकि एक नवंबर की रात्रि में भारत में अमावस्या नहीं रहेगी। बिना अमावस्या के भी दीपावली मनाने लगें????


नवबौद्धिकों के झांसें में न आयें। दीपावली 31 अक्टूबर


को ही मनायें। सनातन के त्यौहारों पर जानबूझकर डीपस्टेट के एजेंट विवाद उत्पन्न करते हैं। पृथ्वी पर घटने वाली घटनाओं की गणना स्थानीय समयानुसार ही करी जाती है। किसी की जन्म कुंडली अंतरिक्ष के समय के अनुसार नहीं बनाई जाती। क्योंकि जातक पृथ्वी पर जन्म लेता है अंतरिक्ष में नहीं। अतः नासा की गणना के नाम पर फैलाये जा रहे प्रोपगंडा से बचें।


ज्योतिष कोई परमात्मा नही यह आपका मार्ग दर्शक है

KUCHH KHAS KHABAR:

KUCHH KHAS KHABAR: 

कुछ महत्वपूर्ण जानकारियाँ...
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#1. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं ।

#2. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |

#3. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से बुरे सपने आते हैं।

#4. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।

#5. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठकर करनी चाहिए । पूजा का आसन जूट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |

#6. पहली रोटी गाय के लिए निकालें । इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |

#7.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें, जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |

#8. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं।

#9. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात् आग्नेय कोण में |

#10. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं।

#11. घर में लगे जाले समय-2 पर साफ करते रहें वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |

#12. सप्ताह में एकबार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |

#13. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुँचे सबसे पहले |

#14. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है, तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो ऐसी व्यवस्था करें🕉️🕉️🕉️🕉️🕉️

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लक्ष्मण की ये बातें सुनकर भगवान श्री राम ने उन्हें गले लगा लिया

14 वर्ष के वनवास के बाद जब भगवान राम वापस अयोध्या आये, तो अगस्त्य ऋषि उनसे मिलने आये और लंकायुद्ध की चर्चा छिड़ गयी।

भगवान राम ने उन्हें बताया कि कैसे उन्होंने रावण और कुंभकर्ण जैसे उग्र नायकों को मार डाला और लक्ष्मण ने इंद्रजीत और अतिकाय जैसे कई शक्तिशाली असुरों को भी मार डाला।

तब अगस्त्य ऋषि ने कहा, 'बेशक रावण और कुंभकर्ण बहुत वीर थे, लेकिन सबसे बड़ा असुर मेघनाद (इंद्रजीत) था। उसने स्वर्ग में देवराजइन्द्र से युद्ध किया और उन्हें बाँधकर लंका ले आया। जब ब्रह्मा ने मेघनाद से उसे छोड़ने के लिए कहा तो इंद्र को मुक्त कर दिया गया। लक्ष्मण ने सबसे शक्तिशाली व्यक्ति को मार डाला, इसलिए वह सबसे महान योद्धा बन गये।

अगस्त्य ऋषि से भाई की वीरता की प्रशंसा सुनकर भगवान राम बहुत प्रसन्न हुए, लेकिन उनके मन में यह जिज्ञासा उठ रही थी कि अगस्त्य ऋषि ऐसा क्यों कह रहे हैं कि इंद्रजीत का वध रावण से भी अधिक कठिन था।

भगवान राम की जिज्ञासा को शांत करने के लिए, अगस्त्य ऋषि ने कहा, "इंद्रजीत को वरदान था कि उसे कोई ऐसा व्यक्ति मार सकता है जो 12 वर्षों तक सोया नहीं था, जिसने 12 वर्षों तक किसी महिला का चेहरा नहीं देखा था और 12 वर्षों तक कुछ भी नहीं खाया था।"

अगस्त्य ऋषि की बातें सुनकर भगवान राम ने कहा, 'मैं वनवास काल के दौरान 14 वर्षों तक नियमित रूप से लक्ष्मण के हिस्से के फल और फूल उन्हें दिया करता था।' "मैं सीता के साथ एक कुटिया में रहता था, बगल की कुटिया में लक्ष्मण थे, फिर उन्होंने सीता का चेहरा भी नहीं देखा और 12 साल तक सोए नहीं, यह कैसे संभव है"!!

लक्ष्मण को बुलाकर इस बारे में पूछा गया। फिर, उन्होंने उत्तर दिया, “जब हम पहाड़ पर गए, तो सुग्रीव ने हमसे उसके गहने दिखाकर उसे पहचानने के लिए कहा। मुझे उसके पैरों में नूपुर के अलावा कोई भी आभूषण नहीं पहचाना, क्योंकि मैंने कभी उसकी ओर देखा ही नहीं। जब आप और देवी सीता कुटिया में शयन करते थे तो मैं सारी रात बाहर पहरा देता था। जब नींद ने मेरी आँखों पर कब्ज़ा करने की कोशिश की तो मैंने अपने बाणों से मेरी आँखों को अवरुद्ध कर दिया था।” तब लक्ष्मण ने 12 वर्ष तक भूखे रहने के बारे में बताया, "मैं जो फल-फूल लाता था उसका 3 भाग आप करते थे। आप मुझे एक भाग देकर कहते थे- यह फल रख लो लक्ष्मण। आपने मुझसे कभी फल खाने को नहीं कहा।" - तो फिर आपकी इजाजत के बिना मैं इसे कैसे खा सकता हूं?

लक्ष्मण की ये बातें सुनकर भगवान श्री राम ने उन्हें गले लगा लिया।'' यही कारण था कि इन कठोर प्रतिज्ञाओं के कारण ही वे मेघनाथ को मारने का साहसी कार्य कर सके और वीर योद्धा कहलाये।

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