पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 01 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 31 अक्टूबर को दिवाली मनाई जाएगी।
दीपावली अमावस्या की रात्रि में मनाई जाती है।जब 1 नवंबर को रात्रि में अमावस्या रहेगी ही नहीं तब दीपावली कैसे मना सकते हैं????
कुछ पर्व दिन में मनाये जाते हैं उनके लिए दिन में तिथि का होना आवश्यक है। कुछ पर्व रात्रि में मनाये जाते हैं उनके लिए रात्रि में तिथि रहना आवश्यक है। इतनी सामान्य सी बात पर भी विवाद हो रहा है। तिथि मुहूर्त आदि की गणना स्थानीय समयानुसार होती है। जन्मकुंडली आदि में भी स्थानीय समय ही मान्य होता। सभी स्थानों पर स्टैंडर्ड समय और स्थानीय समय में अंतर होता है। अतः भारत में और वह भी विशेष शहरों में स्थानीय समय अलग अलग होता है। प्रति एक देशान्तर पर चार मिनट का अंतर आता है। कलकत्ता में आज सूर्योदय 5-36 पर हुआ,सूरत में आज सूर्योदय 6-37 पर हुआ। अर्थात एक देश में ही स्थानीय समय में एक घंटे छह मिनट का अंतर है। भारत में अमावस्या 31 नवंबर को है वह एक नवंबर को अमेरिका में होगी। तो क्या अमेरिका के शुभ के लिए हमें एक नवंबर को दीपावली मनानी चाहिए?????
जबकि एक नवंबर की रात्रि में भारत में अमावस्या नहीं रहेगी। बिना अमावस्या के भी दीपावली मनाने लगें????
नवबौद्धिकों के झांसें में न आयें। दीपावली 31 अक्टूबर
को ही मनायें। सनातन के त्यौहारों पर जानबूझकर डीपस्टेट के एजेंट विवाद उत्पन्न करते हैं। पृथ्वी पर घटने वाली घटनाओं की गणना स्थानीय समयानुसार ही करी जाती है। किसी की जन्म कुंडली अंतरिक्ष के समय के अनुसार नहीं बनाई जाती। क्योंकि जातक पृथ्वी पर जन्म लेता है अंतरिक्ष में नहीं। अतः नासा की गणना के नाम पर फैलाये जा रहे प्रोपगंडा से बचें।
ज्योतिष कोई परमात्मा नही यह आपका मार्ग दर्शक है